एक मुक्तक -एक प्रयास
१
पलकें उठते बैठते ,हर वक्त
नजर पे गश्त लगातीं हैं
जब पलकें सम्मोहित हो जाएं
नज़र को फरार होना ही है।
२
डॉ चन एक मुक्तक -एक प्रयास
पलकें उठते बैठते ,हर वक्त
नजर पे गश्त लगातीं हैं
जब पलकें सम्मोहित हो जाएं
नज़र को फरार होना ही है।
🎄🕯🎄🕯🎄🕯🎄👎🎄
हाइकू
जीवन मिले
रवि रश्मियाँ आई
कुसुम खिले।
पलकें उठीं
प्रेम का स्पर्श पाया
वापस जुटीं।
सपन तेरे
स्याही नहीं कलम
कागद कोरे ।
भक्ति रस में
रमा हरी नाम है
कण्ठ कण्ठ में ।
दृष्टि चंचल
बनाते हैं,भागते
मृग शावक ।
इच्छा अपार
कहते सब ज्ञानी
झूठा संसार।
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