२
लेखक: डॉ चन्द्रा सायता
निर्दयी
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गांव के एक स्कूल में टीचर पांचवी कक्षा को पर्यावरण के विषय में पड़ा रही थी।
सभी बच्चे शांत भाव से सुन रहे थे, किन्तु पलाश कुछ ज्यादा ही उत्साहित लग रहा था।
____'टीचर जी। मेरी दादी भी मुझे पेड़-पौधो और पशु पक्षियों की सुंदर-सुंदर कहानियां सुनाती है। मुझे यह सब देखना- सुनना अच्छा लगता है।'
बहुत बढ़िया पलाश बेटा। दादी से कहानी सुनते समय आसपास के बच्चों को भी बुला लिया करो।' टीचर ने उसका उत्साह वर्धन करते कहा।
____' जी टीचर जी 'पलाश ने चहकते हुए उत्तर दिया।
इतने में प्यून ने आकर टीचर संदेश दिया ---' मैडम जी आपको प्रिंसिपल साहब बुला रहे हैं।
यह आज कहा अंतिम पीरियड था, जिसकी समाप्ति में मात्र पांच मिनट ही शेष थे। बच्चे भी बस्ते बांधकर खेल के मैदान की ओर चल दिए, क्योंकि बाहर जाने का रास्ता खुल रहे के मैदान से होकर ही जाता था ।
सभी बच्चे घर जाने की खुशी में भागे जा रहे थे, परन्तु पलाश थोड़ी दूर जाकर धराशाई अमरूद के पेड़ को देख ठीक गया । खेल के मैदान को बड़ा किया जा रहा था, इसलिए इसे जड़ से ही उखाड़ दिया गया था।
पलाश अंत्यंत भावुक होकर पेड़ को नि हार रहा था । उसकी आंखें सजल हो उठीं। उसने दोनों हाथों को मुट्ठियों उल्टा कर झट से अपनी आंखें पंच वीं , ताकि कोई उसके आंसुओं का मजाक न बना सके।
वह मन ही मन सोचने लगा , कक्षा में जिस शिद्दत के साथ पर्यावरण का पाठ पढ़ाया जा रहा था, किन्तु-----छी-- असल में यही लोग कितने निर्दयी होते हैं।
डॉ चन्द्रा सायता।
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१
लेखक: सितापचन्द पिथावे
"मन की आवाज सुनो"
बहुत साल बाद दो दोस्त रास्ते में मिले। धनवान दोस्त ने उसकी आलिशान गाड़ी पार्क की और गरीब मित्र से बोला चल इस गार्डन में बेठकर बात करते है। चलते चलते अमीर दोस्त ने गरीब दोस्त से कहा - तुझमें और मुझमें बहुत फर्क है। हम दोनों साथ में पढ़े, साथ में बड़े हुए मैं कहाँ पहुँच गया और तू कहाँ रह गया ?
चलते चलते गरीब दोस्त अचानक रुक गया। अमीर दोस्त ने पूछा क्या हुआ ?
गरीब दोस्त ने कहा तुझे कुछ आवाज सुनाई दी?
अमीर दोस्त पीछे मुड़ा और जमीन पर पड़ा पांच का सिक्का उठाकर बोला - ये तो मेरी जेब से गिरे पांच के सिक्के की आवाज़ थी।
गरीब दोस्त एक कांटे के छोटे से पोधे की तरफ गया जिसमे एक तितली पंख फडफडा रही थी। उसने तितली को धीरे से बाहर निकला और आकाश में आज़ाद कर दिया।
अमीर दोस्त ने आतुरता से पुछा - तुझे तितली की आवाज़ केसे सुनाई दी?
गरीब दोस्त ने नम्रता से कहा " तुझमें और मुझमें यही फर्क है। तुझे "धन" की सुनाई दी और मुझे "मन" की आवाज़ सुनाई दी .
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