विवरणिका
इन्डियन सोसाइटी ऑफ ऑथर्स
इन्दौर चेप्टर, इन्दौर
दिनांक 8 जुलाई को कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर में इंडियन सोसायटी ऑफ ऑथर्स, इंदौर चैप्टर इंदौर की मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि सुश्री लिली डावर रही जो नामचीन्ह शिक्षाविद्, समाजसेवी, गायिका, कवयित्री, मंच संचालक-संयोजक, मोटिवेशनल स्पीकर, और प्राचार्य हैं। वे मीरा और कबीर के पदों का मधुर स्वरों में गान करती हैं व कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। शासकीय श्री अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय में वे निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
इन्सा के नियमित सदस्य श्री रविंद्र नारायण पहलवान (उपाध्यक्ष), श्रीमती आशा जाकड़ व श्रीमती ज्योति जैन को उनके साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा हाल ही में सम्मान प्रदान किए गए हैं। उन्हें इन्सा के द्वारा पारम्परिक तौर पर इस सभा में स्मृति चिन्ह प्रदान किये गये। इसके पश्चात इस माह में जिन सदस्यों का जन्म दिवस अथवा परिणय दिवस रहा उन्हें स्मृति चिन्ह व बधाई प्रदान की गई।
गोष्ठी के दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि सुश्री लिली संजय डावर ने अपने मनमोहक स्वर में सरस्वती वंदना 'गूंजे धरा गगन' का गान किया। वे कहती हैं-दिवंगत साथी श्री संजय डावर की सूक्ष्म उपस्थिति उन्हें सदैव महसूस होती है जिसे वह संजय स्पंदन का नाम देती है। वंदना के पश्चात उन्होंने अपने स्वरचित गीत- ना मैं शायर हूं, ना हूं कवयित्री, ना फनकार हूं, मैं नगमों की झंकार हूं, का सस्वर पाठ करके सभा को आनंदित कर दिया और फिर अपनी ही एक और रचना "सावन आया झूम के" की प्रस्तुति शास्त्रीय संगीत में राग मेघ मल्हार पर आधारित गाकर वातावरण को संगीतमय बना दिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने पुस्तक, पुस्तकालय, पाठक और पठन का हमारे जीवन में महत्व समझाया। उनका एक विशिष्ट अभियान "पुस्तकें बुलाती हैं" लायब्रेरी के माध्यम से जारी है।
इन्सा की इस सभा में आहूत वाक्य "बदरवा झूम के बरसो" के अन्तर्गत २६ सदस्यों ने बरखा ऋतु से संदर्भित स्वरचित रचनाओं का पाठ किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आशीष त्रिवेदी ने संस्था की गतिविधियों, उद्देश्यों और क्रिया कलापों से अवगत कराया।
वैसे तो अधिकतर सदस्यों की रचनाएँ सुन्दर थी लेकिन श्रीमती आशा जाकड़, श्रीमती आशा कुशवाहा, श्रीमती ज्योति जैन, राज सांधेलिया, डॉ रवीन्द्र दत्तात्रेय ढोबले और रामनारायण सोनी की रचनाओं को विशेष सराहा गया। संस्था के सचिव रामनारायण सोनी ने शानदार संचालन किया। आभार व्रजेन्द्र नागर ने माना।
अध्यक्ष
आशीष त्रिवेदी
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