🤔🙏🏼 *"दरवाजे "*
*पहले दरवाजे नहीं खटकते थे..*
रिश्ते -नातेदार
मित्र -सम्बन्धी
सीधे
पहुँच जाते थे...
रसोई तक
वहीं जमीन पर पसर
गरम पकौड़ियों के साथ
ढेर सारी बातें
सुख -दुःख का
आदान -प्रदान
*फिर खटकने लगे दरवाजे...*
मेहमान की तरह
रिश्तेदार
बैठाये जाने लगे बैठक में..
नरम सोफों पर
कांच के बर्तनों में
परोसी जाने लगी
घर की शान...
*क्रिस्टल के गिलास में*
*उड़ेल कर ...*
*पिलाई जाने लगी.. हैसियत.*
धीरे -धीरे
*बढ़ने लगा स्व का रूप..*
*मेरी जिंदगी ... मेरी मर्जी*
*अपना कमरा..*
*अपना मोबाइल ..*
*कानों में ठुसे..द्वारपाल..*
*लैपटॉप..*
पर कहीं न कहीं
स्नेहपेक्षी मन....
*प्रतीक्षा रत है...*
*किसी अपने का..!!!*
*पर अब.....*
*दरवाजे नहीं खटकते हैं ..!!!*
😎🤔🙏🏼
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