Friday, June 16, 2017

अलका जैन

झंडा ऊंचा रहे हमारा
बिछोने पर नींद नहीं आती
अर्थी बनवा दो यारो
फूलों से काम नहीं चलेगा अंगारो पर सुला दो यारों
आशियाने की दीवार पर अपनी तस्वीर छोड़ कर मैं सोना चाहता हू कफन ओड कर
कफन बने तिरंगा प्यारा यारो
यही है कोशिश यही है आरजू आपनी
सरहदें लहू मांगती है  कुर्बानी के लिये हम को तैयार रहना होगा
झंडा ऊंचा रहे हमारा यह जज्बा हर भारतीय मै होना चाहिेए

बिछोने पर नींद नहीं आती अर्थी बनवा दो यारों
फूलो से काम नहीं चलेगा अंगारो पर सुला दो यारो

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